फरीदाबाद/- सतयुग दर्शन ट्रस्ट के मार्गदर्शन में समभाव समदृष्टि के स्कूल की एक अनोखा मुहिम, Value Your Virtues यानी हर इंसान अपने कुदरती दिव्य गुणों को महत्व दें | इस अभियान का शुभारंभ 6 अप्रैल, 2026 को फरीदाबाद स्थित सतयुग दर्शन वसुंधरा में किया गया। यह आयोजन इस अभियान के 12वें वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।
इस मुहिम के अंतर्गत ‘अंतर्राष्ट्रीय मानवता ओलंपियाड’ (International Humanity Olympiad), ‘आध्यात्मिक वाक्पटुता’ (Spiritual Eloquence), और ‘कविता सुमन’ (Spiritual Echoes) शामिल है। इस निःशुल्क प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को जीवन उपयोगी मानवीय सद्गुणों के प्रति जागरूक होने का सुअवसर प्रदान किया जाता है। यह अभियान, विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए, एक सशक्त एवं अनूठा मंच प्रदान करता है, जिसके माध्यम से वे संतोष, धैर्य, सच्चाई ,धर्म, समता,निष्काम और परोपकार जैसे मूलभूत दिव्य गुणों से पुनः जुड़ सकते हैं। वर्तमान समय में, जहाँ सामाजिक असमानताएँ और द्वैतवादी सोच निरंतर बढ़ती जा रही हैं, वहां यह अभियान लोगों को संतुलित, मूल्य-आधारित और निष्पाप जीवन जीने के लिए प्रेरित करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है |
जहाँ एक ओर ‘अंतर्राष्ट्रीय मानवता ओलंपियाड’ प्रतिभागियों को 15 मिनट की ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम से इन मूल्यों को समझने और उन्हें आत्मसात करने का सुनहरा अवसर देता है, वहीं ‘आध्यात्मिक वाक्पटुता’ और ‘कविता सुमन’ विद्यार्थियों को इन सद्गुणों की गहराई में उतरने, उन पर चिंतन करने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करने हेतु प्रेरित करता है।ऐसे प्रतिभागी विद्यार्थी पथप्रदर्शक के रूप में विकसित होते हैं, जो न केवल स्वयं इन मूल्यों को अपनाते हैं, बल्कि दूसरों को भी इनके अनुसरण के लिए प्रेरित करते हैं। इस नेक पहल में व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने हेतु, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को 5 लाख रुपये तक के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
इस पहल की व्यापकता और प्रभाव इसकी उल्लेखनीय पहुँच से स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। पिछले 11 संस्करणों के दौरान, केवल ‘अंतरराष्ट्रीय मानवता ओलंपियाड’ में ही 70 लाख से अधिक लोगों की भागीदारी दर्ज की गई है, जो समाज के विभिन्न वर्गों में इसकी गहरी स्वीकार्यता और प्रभावशीलता को दर्शाती है।
इसके अतिरिक्त, ‘आध्यात्मिक वाक्पटुता’ और ‘कविता सुमन’ प्रतियोगिताओं में भी भारत के 22 राज्यों के प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई है, जो इस पहल की पहुँच और सशक्त प्रभाव को और अधिक रेखांकित करता है।
अपने 12वें वर्ष में प्रवेश करते हुए यह अभियान अब एक विश्वव्यापी क्रांति का रूप ले चुका है। पिछले कई वर्षों से विभिन्न राज्य सरकारों तथा शैक्षणिक संस्थानों ने इस आयोजन को अनुमति प्रदान कर इसे सक्रिय समर्थन दिया है।
इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए, दिल्ली, उत्तराखंड, असम, उत्तर प्रदेश, पंजाब की सरकारों ने इस जन कल्याणकारी कार्य के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है; वहीं अन्य राज्यों से भी आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रगति पर है, जिससे इस अभियान की पहुँच और प्रभाव का दायरा और अधिक विस्तृत होगा।
इस प्रतियोगिता का केंद्र बिंदु “भाव-स्वभाव परिवर्तन क्रांति” है—एक सतत जन-अभियान, जिसे सतयुग दर्शन ट्रस्ट ने मानवीय विचार और चारित्रिक उत्थान के उद्देश्य से प्रारंभ किया है। सर्वहित हेतु, इस वर्ष ट्रस्ट देश के विभिन्न शहरों—मुरादाबाद, पंचकूला, अंबाला, जालंधर, लुधियाना, आदि में “समभाव-समदृष्टि” के निःशुल्क स्कूलों का शुभ आरम्भ कर इस अभियान को और सशक्त बनाने जा रहा है।
इस जनहित अभियान के माध्यम से, मानव को कुदरती मानवीय मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। यह उल्लेखनीय है कि यह मुहिम भारत सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के दृष्टिकोण अनुरूप है, जो समग्र विकास और प्रतिभागियों के नैतिक, भावनात्मक और बौद्धिक कल्याण के पोषण पर ज़ोर देती है।
अतः सभी प्राचार्यों,अध्यापकों , छात्रों, सामाजिक संस्थाओं एवं सम्पूर्ण मानव जाति से आग्रह है, कि वे इस भाव-स्वभाव क्रांति में शामिल हो पुनः धर्मज्ञ बनने हेतु समर्पित हों – www.dhyankaksh.org/value-your-virtues
पर जाकर या सतयुग दर्शन ट्रस्ट ऐप डाउनलोड करके उपरोक्त सभी प्रतियोगिताओं में भाग लें और अपने परिवारजनों एवं मित्रजनों को भी प्रेरित करें |
मानवता के शांतिपूर्ण, सुखी और समृद्ध भविष्य के निर्माण हेतु आइए हम अपनी प्रतिबद्धता में एकजुट हो, मानवता के हित को अपने व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर रख, समस्त समाज के उत्थान के लिए निष्काम कार्य करें, ताकि विश्वस्तर पर हर मानव काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार जैसे दानवीय भाव-स्वभाव छोड़, पुनः सम, संतोष, धैर्य, सच्चाई, धर्म, जैसे दिव्य गुण अपना दिव्यता का प्रतीक बन, अपने सर्व उत्कृष्ता को प्राप्त होने में समर्थ हो जाए | अंत में हर जन से करबद्ध प्रार्थना है कि आओ ऐसा अदम्य पुरषार्थ दिखा सजनता के प्रतीक बनें और सतयुग की ओर बढ़ें |
“मानवता अपनाएं सुखी हो जाएं”
“मानवता अपनाएं सुखी हो जाएं”
“मानवता अपनाएं सुखी हो जाएं”





