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May 26th, 2026
तुम स्याह बादल बन आये थे आज मेरे देस और छा गए थे घटा बन घनघोर आकाश पर….मुझ पर…. बरसे थे बूँद बूँद…मुझ पर मैंने थाम लिया था तुम्हे अपनी खुली हथेलितों पर… तुम झरे थे बू... Read more
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